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पशुओं में उष्मीय तनाव – प्रभाव एवं बचाव

के.एल. दहिया1, जसवीर सिंह पंवार2 एवं प्रेम सिंह3

1पशु चिकित्सक, 2उपमण्डल अधिकारी, 3उपनिदेशक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, हरियाणा

भारतवर्ष में वातावरण का तापमान अनोखा है जहाँ उष्णकटिबंधीय दक्षिण भारत में अच्छी वर्षा होती है तो उत्तरी भारत के पहाड़ी क्षेत्र बर्फ की चादर में लिपटे रहते हैं। इसके विपरीत पश्चिमी भारत वर्ष के ज्यादातर महीनों में गर्मी की चपेट में रहता है। इस प्रकार देखा जाए तो भारतवर्ष में मौसम पशुधन को साल में कई बार प्रभावित करता है। अत्यधिक गर्मी के कारण तापघात की स्थिति निर्मित होती है। प्रतिवर्ष मार्च से जून के महीने के दौरान भारत के अधिकांश भागों में उच्च वातावर्णीय तापमान होने के कारण मानव एवं पशुधन उष्मीय तनाव से प्रभावित होते हैं। उष्मीय तनाव (सनबर्न, सन स्ट्रोक, हीट स्ट्रोक) को सामान्य भाषा में तापघात या लू लगना भी कहते हैं।

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