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फसल अवशेष जलाना: मानवता और पर्यावरण के लिए खतरा

के.एल. दहिया1, आदित्य2 एवं जे.एन. भाटिया3

1पशु चिकित्सक, राजकीय पशु हस्पताल, हमीदपुर (कुरूक्षेत्र) हरियाणा

2स्नातकोतर छात्र (पादप रोग), बागवानी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी, हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश)

3सेवानिवृत प्रधान वैज्ञानिक (पादप रोग), कृषि विज्ञान केन्द्र, कुरूक्षेत्र, हरियाणा

बढ़ती आबादी की खाद्यान्न आपूर्ति को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाना ही होगा और इसी के साथ फसल अवशेषों की मात्रा भी बढ़ेगी। अत: फसल अवशेषों को जलाने की आशंका को कम नहीं आंका जा सकता है। यदि इसी प्रकार फसल अवशेषों को जलाया जाता रहा तो देश की खाद्यान्न सुरक्षा खतरे में पड़ने के साथ-साथ वातावरण को भी प्रदूषण से बचाना और बढ़ते प्रदूषण के कारण मानवीय जीवन भी मुश्किल हो जायेगा। अत: आज वातावरण को बचाना आवश्यक है जिसके लिए फसल अवशेषों को जलाने सहित हर तरह के प्रदूषण उत्पन्न करने वाले कारकों को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। यदि हर किसी को शुद्ध वातावरण में जीने का अधिकार है तो प्रदूषण रोकने में भी सभी सहभागिता आवश्यक है।

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