Home / Uncategorized

Uncategorized

सूअर पालन – एक लाभदायक व्यवसाय

के.एल. दहिया पशु चिकित्सक, राजकीय पशु हस्पताल, हमीदपुर (कुरूक्षेत्र)पशुपालन एवं डेयरी विभाग, हरियाणा सूअर पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिससे रोजगार के साथ-साथ अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी अर्जित किया जा सकता है। चीन में एक कहावत कही जाती है ‘अधिक सूअर – अधिक खाद – अधिक अनाज’ अर्थात जिसके पास …

Read More »

भारतीय एवं यूरोपियन गायों में तुलनात्मक अंतर

के.एल. दहिया पशु चिकित्सक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, कुरूक्षेत्र, हरियाणा 1.5 लाख साल पहले पृथ्वी पर अकस्मात् प्राकृतिक एवं भौगोलिक घटनाएं घटी जिससे वायुमण्डल में तेजी से बदलाव आया और परिणाम स्वरूप बॉस जेनरा के शरीर में भी उसके आनुवंशिक (Genetic) रचना में अन्तर्भूत बदलाव आया। परिणाम स्वरूप 6 तरह …

Read More »

रोमंथी पशुओं में बदहजमी (अपच)

के.एल. दहिया1, प्रदीप कुमार2 एवं जसवीर सिंह पंवार3 1पशु चिकित्सक, 3उप मण्डल अधिकरी, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, कुरूक्षेत्र, हरियाणा; 2छात्र, बी.वी.एससी. एण्ड ए.एच. (इंटर्नी) आई.आई.वी.ई.आर. रोहतक, हरियाणा। बदहजमी (अपच) की स्थिति में अधिक मात्रा में अपचित आहार रूमेन में एकत्रित हो जाता है, जिसके कारण रूमेन की कार्य करने की …

Read More »

Omnipresent Plastics: Its Adverse Affects in Animals

K L DAHIYA1, ADITYA2, PARVEEN KUMAR3 & J N BHATIA4Veterinary Surgeon, GVH Hamidpur1 & Ramsaran Majra3 (Kurukshetra), Haryana, India2*Student M.Sc (Agri.) Plant Pathology, Dr. Y S Parmar University of Horticulture and Forestry, College of Horticulture and Forestry, Neri – Hamirpur, H.P, India.4Retired Professor (Plant Pathology) CCS HAU Hisar, Haryana, IndiaSince …

Read More »

ब्ल्यू ऑयस्टर मशरुम की खेती

आदित्य (स्नातकोत्तर छात्र), डॉ. आर एस जरियाल (वैज्ञानिक), डॉ. कुमुद जरियाल (सहायक प्रोफेसर) पादप रोग विज्ञान विभाग डॉ. वाई. एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय बागवानी एवं वानिकी महा विद्यालय, नेरी (हमीरपुर), हिमाचल प्रदेश-177001 ब्ल्यू-ऑयस्टर-मशरुम-की-खेती-1 +606-0606 ratings

Read More »

तापघात से बचें पशुपालक एवं किसान

के.एल. दहिया1 एवं अत्तर सिंह2पशु चिकित्सक, राजकीय पशु हस्पताल हमीदपुर1 एवं दबखेड़ा2 (कुरूक्षेत्र) हरियाणा भारत एक कृषि प्रधान राष्ट्र है और कृषि से जुड़े किसानों, मजदूरों एवं पशुपालकों को खेती के कार्य एवं पशुओं का चारा एकत्रित करने या पशुओं को चराने के लिए खेतों में जाना ही पड़ता है। …

Read More »

लता वर्गीय पौधों से आमदनी के साथ-साथ उनकी छाँव में पशुओं को भी बचाएं गर्मी से

के.एल. दहिया1 एवं अत्तर सिंह2 पशु चिकित्सक, राजकीय पशु हस्पताल हमीदपुर1 एवं दबखेड़ा2 (कुरूक्षेत्र) हरियाणा पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए पेड़ों की छाया अच्छी रहती है लेकिन अब भरपूर संख्या में छायादार पेड़ न होने के कारण कृत्रिम छाया जैसे कि पक्की या एस्बेस्टस शीट से बनी छत्त …

Read More »