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पशु स्वास्थ्य कर्मियों का कोविड-19 महामारी के दौरान पशु और मानव स्वास्थ्य में सुरक्षात्मक योगदान

के.एल. दहिया1, जसवीर सिंह पंवारएवं प्रेम सिंह3

1पशु चिकित्सक, 2उपमण्डल अधिकारी, 3उपनिदेशक पशुपालन एवं डेयरी विभाग, हरियाणा

एक ओर जहां 21वीं सदी के प्रारंभ से कोरोनावायरस के सार्स और मर्स जैसे संक्रमणों से झेला है और अब कोविड-19 से जूझ रहा है। वर्ष 2019 के दिसंबर माह की शुरूआत में उत्पन्न हुए मौजूदा विश्वव्यापी कोविड-19 महामारी का अंदाजा लगाया जा रहा था कि यह वर्ष 2020 की गर्मियों में समाप्त हो जायेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ और दोबारा वर्ष 2021 की गर्मियां शुरू होते ही इसके संक्रमण ने गति पकड़ ली है। अब यह अंदाजा लगा पाना मुश्किल है कि इसका प्रकोप कब खत्म होगा और कितने मनुष्यों को मृत्यु का ग्रास बनायेगा। लेकिन, इतना अवश्य है कि इस वायरस के संक्रमण ने वैश्विक स्तर पर आर्थिक कमर जरूर तोड़ दी है। पिछले वर्ष जब सभी औद्योगिक संस्थान बंद हो गये थे और बहुत से लोग बेरोजगार हो चुके थे, तब कृषि और पशुपालन ने ही राष्ट्र की अर्थ-व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिनका कोविड-19 की चल रही दूसरी लहर में भी महत्वपूर्ण योगदान रहेगा और पशु चिकित्सा कर्मी पहले की भांति अपना संपूर्ण योगदान देते रहेंगे।

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